केंद्र सरकार ने देश में पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली को पूरी तरह रोकने के लिए लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश कर दिया है. हाल ही में देश में हुए बड़े पेपर लीक विवादों और पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद इस कानून को बेहद सख्त बनाकर लाया गया है.

1. संसद का गतिरोध टूटा, 9 घंटे चली चर्चा
- गतिरोध खत्म: लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला के हस्तक्षेप के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सहमति बनी और संसद का हफ्ता भर पुराना गतिरोध टूट गया.
- चर्चा का समय बढ़ा: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने चर्चा का समय 6 घंटे से बढ़ाकर 10 घंटे कर दिया ताकि सभी दल अपनी बात रख सकें.
- देर रात तक बहस: मंगलवार को दोपहर 2 बजे से शुरू होकर रात 11 बजे तक करीब 9 घंटे लगातार चर्चा हुई, लेकिन बिल अभी पास नहीं हो सका है .
2. नए कानून में कड़े प्रावधान और भारी जुर्माना
2024 के पुराने कानून में संशोधन करके नए बिल में सजा और जुर्माने को कई गुना बढ़ा दिया गया है:
- संगठित गिरोह (माफिया): पेपर लीक कराने वाले संगठित सिंडिकेट या माफिया पर ₹10 करोड़ तक का जुर्माना लगेगा.
- लंबी जेल: दोषियों को 10 साल तक की जेल की सजा दी जाएगी.
- दोषी अधिकारी: परीक्षा कराने वाले बोर्ड या एजेंसी के दोषी अधिकारियों को 5 साल तक की जेल होगी.
- ब्लैकलिस्ट की अवधि: धांधली में शामिल पाए जाने वाले सर्विस प्रोवाइडर (एजेंसियों) पर अब 8 साल का प्रतिबंध (बैन) लगाया जाएगा.
3. फास्ट-ट्रैक कोर्ट और जांच की समय-सीमा
अदालती कार्यवाही में देरी को रोकने के लिए इस विधेयक में सख्त समय-सीमा तय की गई है:
- 60 दिनों में जांच: विशेष कार्य बल (STF) को मामले की जांच 60 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी.
- 3 महीने में फैसला: चार्जशीट दाखिल होने के बाद विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों को 3 महीने के भीतर अपना फैसला सुनाना होगा.
- अपील का निपटारा: हाई कोर्ट को किसी भी अपील पर 90 दिनों के भीतर निर्णय देना होगा.
4. विपक्ष का तीखा प्रहार
विपक्ष ने इस कानून को सरकार की नाकामी को छिपाने का जरिया बताया है:
- “दिखावे का बिल”: कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि जब 2024 का कानून पेपर लीक नहीं रोक पाया, तो यह नया संशोधन सिर्फ एक दिखावा है .
- सिस्टम पर सवाल: सांसद शशि थरूर ने कहा कि परीक्षा से पहले सुरक्षा पुख्ता करने की जरूरत है, सिर्फ बाद में सजा बढ़ाने से कुछ नहीं होगा.
- NEET और NTA का विरोध: DMK और अन्य विपक्षी दलों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को भंग करने और NEET-UG परीक्षा को पूरी तरह खत्म करने की मांग दोहराई.
FAQ
Q1. ‘लोक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026’ क्या है?
Ans: यह केंद्र सरकार द्वारा सरकारी नौकरियों और राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं (जैसे NEET, JEE) में पेपर लीक, नकल और संगठित धोखाधड़ी को रोकने के लिए लाया गया एक बेहद सख्त कानून है.
Q2. इस नए कानून में पेपर लीक माफिया के लिए क्या सजा है?
Ans: संगठित रूप से पेपर लीक करने वाले गिरोहों पर ₹10 करोड़ तक का भारी जुर्माना और दोषियों को 10 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है.
Q3. इस कानून के तहत मामलों की जांच कितने दिनों में पूरी करनी होगी?
Ans: जांच एजेंसियों को केस दर्ज होने के बाद 60 दिनों के भीतर अपनी जांच पूरी करके चार्जशीट दाखिल करनी होगी.
Q4. विपक्ष इस विधेयक का विरोध क्यों कर रहा है?
Ans: विपक्ष का आरोप है कि सरकार परीक्षाओं की सुरक्षा मजबूत करने और NTA जैसी संस्थाओं में सुधार करने के बजाय सिर्फ सजा बढ़ाकर अपनी नाकामियों को छिपाने की कोशिश कर रही है .
